[1] मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2020 के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने कमर कस लिया है और अपनी अपनी तैयारियां शुरू कर दी है
[2] वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग भी अपनी तैयारियों में जुट गया है तथा वोटर लिस्ट का निरीक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया है । कोरोनावायरस के बीच किस तरीके से चुनाव कराया जाए इस पर भी चुनाव आयोग विचार कर रहा है तथा अपने अधिकारियों से लगातार विचार-विमर्श कर रहा है । आपको बताते चलें कि उपचुनाव के कराए जाने की सीमा सितंबर महीने तक ही है । क्योंकि मार्च महीने में विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे इसलिए मार्च से 6 महीना के अंदर चुनाव करना अनिवार्य है अतः सितंबर तक ही अंतिम समय सीमा है ।
[3] ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके 22 समर्थक विधायकों के कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस सरकार मध्यप्रदेश में गिर गई थी । इस कारण से 22 सीटें चुनाव के लिए खाली हो गई इसके पहले 2 सीटें खाली थी । अभी हाल ही के दिनों कांग्रेस के दो और विधायकों ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है । कुल मिलाकर इस तरीके से 26 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है ।
[4] जहां एक तरफ सत्ताधारी दल शिवराज सिंह चौहान के तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी कमलनाथ के नेतृत्व में चुनावी रणभूमि में उतर चुकी है । कांग्रेस पार्टी की ओर से चुनाव की रणनीति का निर्माण मशहूर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर कर रहे हैं और कमलनाथ ने भोपाल छोड़कर अपना हेडक्वार्टर ग्वालियर को बनाया है , इस समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की आईटी टीम भारतीय जनता पार्टी के टीम पर भारी पड़ती हुई दिखाई दे रही है ।
[5] मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस पार्टी को 114 सीटें और भारतीय जनता पार्टी को 109 सीटें मिली थी , और मध्य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं जिसमें 116 सीट प्राप्त करने वाले दल को पूर्ण बहुमत मिल जाता है । कांग्रेस पार्टी ने प्रदर्शन तो अच्छा किया लेकिन 2 सीटों से पीछे रह गई बाद में निर्दलीयों बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के विधायकों की मदद से कांग्रेस पार्टी सरकार बनाने में सफल रही । मगर सरकार बनने के पहले दिन से ही सरकार की स्थिरता पर अनिश्चितता बनी हुई थी । और बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जिस तरीके से अपने 22 विधायक समर्थकों को साथ लेकर बगावत कर दिया और मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी की सरकार गिर गई ।
[6] मध्यप्रदेश उपचुनाव चुनाव को लेकर प्राइवेट कंपनियों के आंतरिक सर्वे -
कमलनाथ ने दो प्राइवेट कंपनियों से मध्य प्रदेश के इन सीटों पर उपचुनाव को लेकर के अपना सर्वे कराया था जिसमें 26 में से कांग्रेस पार्टी के खाते में 22 सीटें जाती हुई दिखाई दे रही हैं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के खाते में 2 सीटें जाने की संभावना है और 2 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस में कड़ी टक्कर है ।

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