केरल के वर्तमान मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इस जीत को लोकतंत्र और सेक्युलरवाद की जीत बताया है ।
केरल में पिछले 6 नवंबर को इलेक्शन कमीशन ने स्थानीय चुनाव के लिए शेड्यूल जारी किया था, नॉमिनेशन की अन्तिम तारीख 19 नवंबर को थी , प्रथम चरण का मतदान 8 दिसंबर , दितीय चरण का मतदान 10 दिसंबर और तृतीय चरण का मतदान 14 दिसंबर को हुआ नतीजे 16 दिसंबर को घोषित किए गए । इन चुनावों में केरल के 76.2 % मतदाताओं ने भाग लिया था ।
केरल में ग्राम पंचायत की 941, ब्लॉक पंचायत 152, डिस्ट्रिक्ट पंचायत 14 , म्युनिसिपैलिटी 86 और कारपोरेशन की 6 सीटें हैं।
घोषित नतीजे में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले एलडीएफ गठबंधन को जीत मिली है ।
LDF गठबंधन को ग्राम पंचायत के 514 ,ब्लॉक पंचायत के 108 , डिस्ट्रिक्ट पंचायत की 10 म्युनिसिपैलिटी की 35 और कारपोरेशन की 03 सीटों पर बहुमत प्राप्त हुआ ।
LDF को मिले इस जीत से वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ताओं में 2021 में होने वाले केरल विधानसभा चुनाव को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। केरल के इस पंचायत चुनाव को विधानसभा से पहले का सेमीफाइनल मुकाबला माना जा रहा था ।
इस चुनाव में यूडीएफ गठबंधन को मात मिली है यूडीएफ गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस पार्टी करती हैं - UDF को ग्राम पंचायत के 375, ब्लॉक पंचायत की 44 , डिस्ट्रिक्ट पंचायत के 04 , म्युनिसिपालिटी की 45 , कारपोरेशन की 01 सीट पर जीत मिली है ।
विधानसभा चुनाव के ठीक पहले मिली इस हार से कांग्रेस गठबंधन में मंथन का दौर शुरू हो गया है।
भाजपा के दक्षिण विजय की उम्मीदों पर फिरा पानी - भारतीय जनता पार्टी ने कुछ दिन पहले ही हैदराबाद नगर निगम चुनाव में काफी अच्छा प्रदर्शन किया था भाजपा को केरल में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन उसकी उम्मीदें टूटती नजर आई ।
भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को ग्राम पंचायतों में 29 सीटें मिलीं और म्युनिसिपालिटी में महज 04 सीटों से ही संतोष करना पड़ा ।
गौरतलब है कि NDA का ब्लॉक पंचायत डिस्ट्रिक्ट पंचायत , और कारपोरेशन में खाता भी नहीं खुल सका ।


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