पिछले दिनों लखनऊ में AIMIM पार्टी के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर की मुलाकात से यूपी की सियासत गरमाई हुई है । ओमप्रकाश राजभर और ओवैसी की मुलाकात से इन दोनों के बीच गठबंधन होना तय माना जा रहा है गौरतलब है कि पहले से ही ओमप्रकाश राजभर और पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा दोनों ने मिलकर भागीदारी संकल्प मोर्चा यूपी में बनाया हुआ है इस मोर्चे के साथ अब ओवैसी का भी जुड़ना तय माना जा रहा है । 



ओमप्रकाशश राजभर पूर्व मंत्री और बाबू सिंह कुशवाहा पूर्व मंत्री इन दोनों ने मिलकर कुल आठ दलों का भागीदारी संकल्प मोर्चा नामक गठबंधन उत्तर प्रदेश में बनाया हुआ है इस मोर्चे में अब बहु चर्चित मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी के भी शामिल होने के औपचारिक घोषणा हो गई हैं, ओवैसी के इस मोर्चे में शामिल होने से इस मोर्चे को और मजबूती मिलेगी ।
बातचीत के दौरान ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि इस मोर्चे में वह और छोटे दलों को जोड़ रहे हैं और यह मोर्चा समाजवादी पार्टी के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी को भी चुनौती देगा । 

भागीदारी संकल्प मोर्चा के इस गठबंधन में शिवपाल यादव के भी जुड़ने की चर्चाएं तेज हैं इसके अलावा पश्चिमी यूपी के युवा नेता चंद्रशेखर रावण भी इस मोर्चे के साथ जुड़ सकते हैं क्योंकि पिछले दिनों लखनऊ में रावण और राजभर की मुलाकात हुई थी। वर्तमान समय में भागीदारी संकल्प मोर्चा में ओमप्रकाश राजभर, बाबू सिंह कुशवाहा और असदुद्दीन ओवैसी यह तीनों नेता अपनी-अपनी जातियों में काफी अच्छी पकड़ रखते हैं। किसी जमाने में बाबू सिंह कुशवाहा ( पूर्व मंत्री ) बहुजन समाज पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखते थे अब वर्तमान समय में उन्होंने जन अधिकार पार्टी नामक दल बनाया है जो उत्तर प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा का चुनाव लड़ चुका है। बाबू सिंह कुशवाहा के हैसियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में इनकी पार्टी जन अधिकार पार्टी से गठबंधन किया था और बाबू सिंह कुशवाहा को सात लोकसभा की सीटें लड़ने के लिए गठबंधन में मिली थी । भागीदारी संकल्प मोर्चा के चुनाव लड़ने से उत्तर प्रदेश में अति पिछड़े और मुस्लिम वोटों का बंटवारा होगा जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। 

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